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संक्षिप्त परिचय
 

प्रदेश की विकास प्रक्रिया में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी का विशेष महत्व है। प्रदेश की मूलभूत समस्याओं यथा- जनसंख्या, बेरोजगारी, स्वास्थ्य, पर्यावरण,ऊर्जा एवं खाद्यान इत्यादि के निवारण में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी की भूमिका सदैव महत्वपूर्ण रही है। प्रदेश में विज्ञान का व्यापक प्रचार-प्रसार, इसका लोकप्रियकरण, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में शोध के कार्य विभाग के मुख्य कार्य हैं। विज्ञान के क्षेत्र में विभिन्न कार्यो एवं योजनाओं के क्रियान्वयन हेतु विभाग द्वारा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद, उ०प्र० एवं सुदूर संवेदन उपयोग केन्द्र, लखनऊ की स्थापना की गयी। जैव प्रौद्योगिकी के विकास एवं इसके ढांचागत विकास पर शासन द्वारा विशेष बल दिया जा रहा है। शासन द्वारा उत्तर प्रदेश जैव प्रौद्योगिकी नीति २००४ तैयार की गयी है, जिसके अधीन प्रदेश के औद्योगिक निवेश व रोजगार सृजन में वृद्धि के साथ-साथ प्रदेश व्यापी आवश्यक ढांचा विकसित करने हेतु कतिपय परिगामियाँ व छूटें दी गयी हैं। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग एवं भारत सरकार के जैव प्रौद्योगिकी विभाग के सहयोग से लखनऊ में एक बायोटेक पार्क की स्थापना की गयी है। विभाग द्वारा लखनऊ एवं गोरखपुर में नक्षत्रशालाओं की स्थापना की गयी है तथा रामपुर में एक नक्षत्रशाला की स्थापना की जा रही है।