India Image

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद, उ०प्र० के अन्तर्गत किये जाने वाले मुख्य कार्य
  •     विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के चयनित क्षेत्रों में शोध

परिषद द्वारा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के विभिन्न क्षेत्रों में प्रदेश में स्थित विश्‍वविद्यालयों, चिकित्सा विश्‍वविद्यालयों, कृषि विश्‍वविद्यालयों, पी.जी. कालेजों,शोध संस्थानों के माध्यम से विभिन्न शोध परियोजनायें क्रियान्वित की जातीहैं। वर्तमान में कुल ८० शोध प्रायोजनायें चल रही हैं एवं नई ४० शोध प्रायोजनायें प्रारम्भ की जानी प्रस्तावित हैं। उक्त के अतिरिक्त प्रदेश में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में आधारभूत ढांचा बनाने के दृश्टिकोण से विशिष्ट क्षेत्रों में सेन्टर ऑफ एक्सीलेन्स स्थापित करना प्रस्तावित है

  • उद्यमिता प्रोत्साहन

बेरोजगारी के निदान के उद्देश्य से उद्यमिता विकास एवं प्रोत्साहन के महत्व के दृश्टिगत प्रदेश में उद्यमिता जागरुकता कार्यक्रम, उद्यमिता विकास कार्यक्रम व विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के माध्यम से बृहद रोजगार सृजन जैसे कार्यक्रम क्रियान्वित किये जाते हैं।

  •  वैज्ञानिक जागरूकता का जनमानस में प्रसार

परिषद द्वारा उक्त के अन्तर्गत जनमानस में विज्ञान के प्रति अभिरूचि उत्पन्न करने, तार्किक क्षमता विकसित करने, कल्पनाशीलता विकसित करना, वैज्ञानिक ढंग अपनाने, वैज्ञानिक जागरुकता उत्पन्न करने इत्यादि से सम्बन्धित कार्यक्रमों का आयोजन प्राय: राष्‍ट्रीय दिवसों, खगोलीय/भौतिक घटनाओं के अवसर पर व सामाजिक/ शौक्षिक अवसरों पर विज्ञान संचार के विभिन्न माध्यमों से यथा पोस्टर प्रदर्शनी, वाद-विवाद प्रतियोगिता, स्लोगन राइटिंग प्रतियोगिता, रूचिकर साहित्य, फिल्म शो, कठपुतली शो, चमत्कारों की वैज्ञानिक व्याख्या, शिक्षाविदों के व्याख्यान इत्यादि के माध्यम से किया जाता है। उक्त के अतिरिक्त इस योजना के अन्तर्गत सेमीनार्स, सिम्पोजियम कार्यशालाओं के आयोजन एवं शैक्षिक/संगठित संस्थाओं को वैज्ञानिक शोध पत्रिकाओं के प्रकाशन हेतु भी वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है।

  •   नक्षत्रशाला -समाज विशेषकर बच्चों के लिये शैक्षिक साधन

प्रदेश में खगोल विज्ञान को रूचिकर एवं ज्ञानवर्धक प्रकार से प्रस्तुत कर इस क्षेत्र में जागरुकता उत्पन्न करने के उद्देश्य से विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा प्रदेश में दो नक्षत्रशालाओं की स्थापना की जा चुकी है तथा एक नक्षत्रशाला का स्थापना कार्य किया जा रहा है जिनका संक्षिप्त विवरण निम्नवत है:

                    इन्दिरा गाँधी नक्षत्रशाला, लखनऊ

इन्दिरा गाँधी नक्षत्रशाला, लखनऊ का शुभारम्भ ०८ मई, २००३ को किया गया था। शनि ग्रह के आकार में बनी यक्षत्रशाला में विश्व की एकमात्र नक्षत्रशालाहै। इसकी स्थापना के समय यह देश की प्रथम नक्षत्रशाला थी जिसमें आप्टोमेकेनिकल उपकरणों के साथ-साथ वीडियो प्रोजेक्टर भी लगाये गये। नक्षत्रशाला में प्रतिदिन चार शो चलाये जाते हैं जिनका समय दिन में १:०० बजे, २:३० बजे, ४:०० बजे तथा ५:०० बजे है। नक्षत्रशाला में विकलांगों हेतु प्रवेश नि:शुल्क है।

         २ वीर बहादुर सिंह नक्षत्रशाला, गोरखपुर

वीर बहादुर सिंह नक्षत्रशाला, गोरखपुर का शुभारम्भ २३ जनवरी, २००६ को किया गया था। यह देश की द्वितीय नक्षत्रशालाहै जिसमें डिजिटल तकनीक पर आधारित उपकरणों की स्थापना की गयी है। इस नक्षत्रशालाकी स्थापना गोरखपुर विकास प्राधिकरण द्वारा की गयी है

        ३ रामपुर नक्षत्रशाला

रामपुर में एक नक्षत्रशालाकी स्थापना की जा रही है। भारत में पहली बार डिजिटल लेजर तकनीक पर आधारित उपकरणों की स्थापना इस नक्षत्रशालामें की जायेगी।

  •    पेटेण्ट सेल

परिषद के अन्तर्गत पेटेण्ट सूचना एवं बौद्धिक सूचना संरक्षण सम्बन्धी गतिविधियों हेतु भारत सरकार के वित्तीय सहयोग से पेटेण्ट सेल स्थापित है। पेटेण्ट सेल द्वारा सूचना एवं बौद्धिक सम्पदा संरक्षण के सम्बन्ध में जानकारी प्रदान करने एवं जागरुकता उत्पन्न करने के उद्देश्य से विभिन्न शैक्षिक संस्थानों यथा पॉलिटैक्नीक, विश्वविद्यालयों इत्यादि में कार्यशालाओं का आयोजन किया जाता है। वर्श २००५-०६ में केन्द्र से सम्पर्क कराने वाले २८ अन्वेशकों को बौद्धिक सम्पदा संरक्षण एवं इसके विभिन्न अव्यवों यथा पेटेण्ट, डिजाइन रजिस्ट्रेशन, प्लाण्ट वैरायटी प्रोटेक्शन पर मार्गदर्शन दिया गया।

  •   जैव प्रौद्योगिकी-प्रदेशमें संगठनात्मक ढांचा एवं क्षमता विकास

कृषि, उद्योग, खाद्यान्न, पोषक तत्व प्रबन्धन, चिकित्सा एवं स्वास्थ, पर्यावरण व ऊर्जा के क्षेत्र में जैव प्रोद्योगिकी के बहुआयामी उपयोग के दृश्टिगत उक्त योजना का प्रारम्भ वर्श १९९८-९९ में किया गया था। शोध विकास परियोजनाओं के साथ-साथ उक्त योजना के अन्तर्गत उत्तर प्रदेश जैव प्रौद्योगिकी नीति २००४ घोषित की गयी। उत्तर प्रदेश जैव प्रौद्योगिकी बोर्ड का गठन, बायोटेक पार्क, लखनऊ की स्थापना एवं बायोटेक नेटवर्किंग फेसिलिटी जैसी बृहद योजनायें विकसित की गयीं।

  •  विज्ञान सम्मान पुरस्कार

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद द्वारा विज्ञान को अधिक लोकप्रिय बनाने एवं इसमें रूचि जागृत करने, वैज्ञानिकों को सम्मान देने के उद्देश्य से विभिन्न पुरस्कारों का वितरण किया जाता है। इनमें मुख्य विज्ञान रत्न, विज्ञान गौरव, यंग साइंन्टिस्ट, साइंस शिक्षक एवं नव अन्वेषक पुरस्कार मुख्य हैं। विज्ञान के क्षेत्र में बच्चों में रूचि जागृत करने के उद्देश्य से विज्ञान विषयों में अधिकतम अंक पाने वाले कक्षा १० व १२ के विद्यार्थियों को भी पुरस्कार दिये जाते हैं।