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सुदूर संवेदन उपयोग केन्द्र, लखनऊ, उत्तर प्रदेश के अन्तर्गत किये जाने वाले मुख्य कार्य

केन्द्र द्वारा प्रदेश के समस्त प्राकृतिक संसाधनों की समुचित खोज एवं सुनियोजित प्रबन्धन हेतु नवीनतम सुदूर संवेदन तकनीक द्वारा बहुमूल्य आंकड़े सृजित किये गये हैं जिससे प्रदेश शासन के विभिन्न उपयोगकर्ता विभाग लाभान्वित हुये हैं। केन्द्र द्वारा भू-सम्पदा, जल संसाधन, वन एवं कृषि सम्पदा, मृदा, भूमि उपयोगिता/भूमि आच्छादन तथा नगरीय संरचना सम्बन्धी कोष्ठों के अनेक बहुमूल्य आंकड़े सृजित किये गये हैं एवं वर्तमान में किये जा रहे हैं।

  •  प्रदेश के जिलों के प्राकृतिक संसाधनों का सर्वेक्षण एवं डेटा बैंक

सुदूर संवेदन उपयोग केन्द्र, उत्तर प्रदेश द्वारा सम्पूर्ण प्रदेश में प्राकृतिक संसाधनों के एकीकृत सर्वेक्षण के माध्यम से जनपदवार एवं जलसमेट क्षेत्रवार विकास योजनायें सृजित की जा रही हैं, जिससे प्रदेशके विभिन्न उपयोगकर्ता विभाग लाभान्वित हो सकते हैं। वर्ष २००६-०७ में कई नवीन परियोजनाओं के माध्यम से प्रदेश में भूगर्भीय प्राकृतिक सम्पदा की खोज, जल संसाधनों के सुनियोजित उपयोग हेतु समुचित अध्ययन, कृषि एवं मृदा, भूमि उपयोगिता एवं नगरीय संरक्षण, वन सम्पदा में बढ़ोत्तरी, प्रत्येक ग्राम स्तर तक  पेयजल एवं कृषि योग्य जल उपलब्ध कराना तथा प्रमुख नदियों में प्रदूषण निम्नीकरण की दिशामें आंकड़े उपलब्ध कराना केन्द्र  की प्रमुख गतिविधियां हैं।

  •  प्राकृतिक आपदाओं के सम्बन्ध में कार्य

प्रदेश में आने वाली प्राकृतिक आपदाओं जैसे बाढ़ एवं सूखा से हुई क्षति का आंकलन इस आशय से किया जा रहा है कि भविष्य  क्षति निम्नीकरण की दिशा में उपयोगी सूचनायें सृजित की जा सकें। विगत वर्षों में पूर्वी एवं मध्य उत्तर प्रदेश में आयी बाढ़ से क्षति का आंकलन उपग्रहीय चित्रों के माध्यम से केन्द्र द्वारा किया गया है, जिससे राहत कार्यो में सहयोग मिल सके। इस दिशा में प्रदेश के महाराजगंज एवं सिद्धार्थनगर जनपदों हेतु आपदा प्रबन्धन प्रणाली का गठन केन्द्र द्वारा किया जा रहा है। इसके अतिरिक्त केन्द्र द्वारा उत्तरांचल के माल्पा, ऊखीमठ, नैनीताल तथा मन्सूरी क्षेत्रों में भूस्खलन सम्बन्धी अध्ययन किये गये हैं। प्रदेशके सोनभद्र, महोबा एवं ललितपुर जनपदों में भू-पर्यावरणीय अध्ययन भी केन्द्र द्वारा सम्पादित किये जा रहे हैं।

  •  केन्द्र की नई योजनायें

पूरे प्रदेश के लिये खसरा स्तर पर उपलब्ध संसाधनों का कम्प्यूटरीकृत डाटाबेस तैयार किया जाना एवं अन्तरिक्ष में भेजे गये माइक्रोवेव उपग्रहों से प्राप्त होने वाले आकंड़ो के विशलेषण हेतु आधारभूत सुविधायें सृजित करने का कार्य केन्द्र द्वारा इसी वर्ष प्रारम्भ किया गया है।

  •  प्राकृतिक संसाधनों का एकीकृत सर्वेक्षण

प्रदेश के चहुँमुखी विकास हेतु समस्त प्राकृतिक संसाधनों का एकीकृत सर्वेक्षण इस केन्द्र द्वारा किया जा रहा है। जिसके अन्तर्गत प्राकृतिक संसाधनों सम्बन्धी आंकड़ों का सृजन उपग्रहीय चित्रों के निर्वेचन द्वारा किया जा रहा है एवं भौगोलिक सूचना पद्धति (जी.आई.एस.) के उपयोग द्वारा उक्त आंकड़ों का सम्बन्धित जनपद में सामाजिक-आर्थिक आंकड़ों से समन्वय करके जनपद के विकास कार्यक्रमों हेतु प्रभावी विकास योजनायें तैयार की जा सकेंगी। पूरे प्रदेश हेतु यह कार्य अन्तिम चरणों में है। तदोपरान्त प्रत्येक जनपद हेतु सृजित कम्प्यूटरीकृत आंकड़े उसी जनपद मुख्यालय में जनपद के अधिकारियों के उपयोगार्थ उपलब्ध कराये जायेंगे।